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  • Written By: Admin
  • Published: July 25, 2026 02:12 PM IST
राज्य

एलयूसीसी निवेशकों ने की सत्यापन प्रक्रिया में राहत की मांग को लेकर दिया सांकेतिक धरना

ऋषिकेश। एलयूसीसी चिटफंड घोटाले में फंसे उत्तराखंड के लाखों निवेशकों के धनवापसी आवेदन पत्रों के सत्यापन में आ रही व्यावहारिक समस्याओं के विरोध में उत्तराखंड जन विकास मंच के बैनर तले ऋषिकेश तहसील परिसर में दो घंटे का सांकेतिक धरना-प्रदर्शन आयोजित किया। धरने में बड़ी संख्या में पीड़ित निवेशकों ने भाग लेकर सरकार और प्रशासन से आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग उठाई।
धरने को संबोधित करते हुए मंच के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने कहा उच्च न्यायालय के निर्देश पर एलयूसीसी मामले में लिक्विडेटर नियुक्त किया गया है। जिसके माध्यम से निवेशकों से धनवापसी के लिए आवेदन पत्र भरवाए जा रहे हैं। वर्तमान प्रक्रिया अत्यधिक जटिल होने के कारण सामान्य निवेशकों को आवेदन भरने में कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। छोटी-छोटी तकनीकी त्रुटियों के कारण आवेदन निरस्त होने की आशंका बनी हुई है।
उन्होंने बताया कि आवेदन पत्रों को राजपत्रित अधिकारी से सत्यापित कराना अनिवार्य किया गया है, जबकि अधिकारियों की सीमित संख्या के कारण प्रतिदिन केवल 40 से 50 आवेदन ही सत्यापित हो पा रहे हैं। ऐसे में निर्धारित समय सीमा के भीतर हजारों निवेशकों के आवेदन पूरे होना संभव नहीं दिख रहा है। इससे बड़ी संख्या में पीड़ितों के धनवापसी से वंचित रहने का खतरा पैदा हो गया है।
आशुतोष शर्मा ने बताया केवल ऋषिकेश तहसील क्षेत्र में ही लगभग 20 हजार निवेशक प्रभावित हैं। पूरे उत्तराखंड में एलयूसीसी घोटाले से 1 लाख 60 हजार से अधिक निवेशक प्रभावित बताए जा रहे हैं। इनमें लगभग 90 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो अपनी जीवनभर की जमा पूंजी वापस पाने के लिए सरकारी प्रक्रिया पर निर्भर हैं।
उन्होंने मांग की कि प्रशासन केवल तहसील स्तर तक व्यवस्था सीमित न रखे, बल्कि ऋषिकेश, हरिपुर कलां, रायवाला और आसपास के क्षेत्रों में विशेष सत्यापन शिविर आयोजित कर राजपत्रित अधिकारियों की अतिरिक्त टीमें तैनात करे, ताकि अधिक से अधिक निवेशकों के आवेदन समय पर सत्यापित हो सकें।
मंच के अध्यक्ष ने कहा कि इस संबंध में 13 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजा गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र ही आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने और सत्यापन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए, तो प्रभावित निवेशकों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एक बार फिर न्यायालय की शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। धरने में शामिल निवेशकों ने भी सरकार से शीघ्र समाधान की मांग करते हुए धनवापसी प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाने की अपील की।

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