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  • Written By: Admin
  • Published: September 22, 2026 04:51 PM IST
राज्य

ज्योलिकोट मामले पर की हाईकोर्ट ने सुनवाई,अधिकारियों को कोर्ट में पेश होने को कहा

नैनीताल। ज्योलिकोट और उसके आसपास के गांवों-गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान तथा सरियाताल में दूषित पेयजल के कारण फैली जल जनित बीमारियों के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। नैनीताल के जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ), उत्तराखंड जल संस्थान के महाप्रबन्धक और उत्तराखंड पेयजल निगम (कुमाऊं मंडल) के मुख्य अभियंता मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुए।
कोर्ट नें उनसे कहा है कि अगली तिथि को भी कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हों। साथ में कोर्ट ने उनसे यह भी बताने को कहा है कि चीफ सेक्टरी के अध्यक्षता वाली कमेटी में नौ सदस्यई कमेटी गठित की गयी है उसने अब तक इससे निजात पाने के लिए क्या जरूरी कदम उठाये हैं। अगली तिथि को कोर्ट को इसके बारे में अवगत कराएं।
कोर्ट ने प्रशासन ने पूछा है कि जब जल कि शुद्धता के लिए क्षेत्र के ग्राम प्रधानों के द्वारा संबंधित अधिकारी से शिकायत की गयी थी तों उसके बाद भी उनके द्वारा उस अधिकारी के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाये गए। इसके बारे में भी कोर्ट को बताएं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 सितंबर की तिथि नियत की है।
मंगलवार को हुई सुनवाई पर राज्य सरकार की तरफ से कहा गया की चीफ स्केटरी की अध्यक्षता में प्रसाशन नें मामले की जांच कराने के लिए नौ सदस्यों की कमेटी गठित कर दी है। जिसकी प्रथम बैठक कल होनी है. जिसमे जल संस्थान, जल निगम, के जानकर अधिकारी, पीसीबी व स्वास्थ्य विभाग के सदस्य सहित कई अन्य जानकर अधिकारी शामिल हैं। साथ ही अवगत कराया गया कि नैनीताल शहर के 17 सैम्पल लिए गए थे. ये सही सही पाए गए हैं। कुछ जल के स्रोतो में क्लोरीन की कमी पाई गयी है। सरिता ताल सहित अन्य जगहों के जल स्रोतों के सैम्पल आज लिए जा रहे हैं। क्षेत्रवासियों की तरफ से कहा गया कि शिकायत करने के बाद भी उस पर कोई कार्यवाही नहीं गयी. जिसपर कोर्ट नें रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
मामले के अनुदार पिछले तीन महीनों से क्षेत्र में डायरिया और पीलिया जैसी बीमारियां फैलने, दो लोगों की मौत हो गई है। बड़ी संख्या में ग्रामीणों के बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। जिसे देखते हुए बेलुवाखान निवासी अधिवक्ता रवि बिष्ट ने जनहित याचिका दायर की। याचिका में मामले का उल्लेख करते हुए विभागीय अधिकारियों की निष्क्रियता का मुद्दा उठाया गया। प्रभावितों के निःशुल्क इलाज व स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की मांग की गई।

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