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  • Written By: Admin
  • Published: November 01, 2026 02:14 PM IST
राज्य

आजादी के बाद पहली बार सीपू गांव में पहुंचा वाहन, खुशी से झूम उठे ग्रामीण

पिथौरागढ़। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के दुर्गम क्षेत्रों में विकास की एक नई तस्वीर सामने आई है। आजादी के 79 साल बाद चीन सीमा से लगे वाइब्रेंट विलेज सीपू तक सड़क पहुंच गई है। वहीं गांव में पहली बार गाड़ी पहुंचने पर ग्रामीण खुशी से झूम उठे। समुद्र तल से करीब 11,820 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस गांव तक सड़क पहुंचना क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। लंबे समय से सड़क सुविधा की राह देख रहे ग्रामीणों के लिए यह किसी सपने के साकार होने से कम नहीं है। अब तक सीपू गांव के लोगों को आवागमन के लिए कठिन पहाड़ी रास्तों और पैदल यात्रा पर निर्भर रहना पड़ता था। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम में ढाकर-तिदांग-मारछा-सीपू मोटर मार्ग का निर्माण किया जा रहा है। पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता किशन सिंह ऐरी के अनुसार, करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से 10 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण जुलाई 2024 से किया जा रहा है. विभाग ने 24 अक्टूबर को फिलहाल अस्थायी रूप से सड़क की कटिंग पूरी कर गांव को जोड़ दिया है। सड़क निर्माण का कार्य वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस मार्ग को पूरी तरह सुचारू बनाने के लिए चार पुलों का निर्माण भी प्रस्तावित हैं। पागल नाला (च्यो यांगती) में 60 मीटर, धौली नदी में 100 मीटर तथा सीपू और मारछा के बीच न्योला और लच्छर नदी में 42-42 मीटर स्पान के स्टील मोटर पुल बनने हैं। इसके लिए विभाग की ओर से डीपीआर शासन को भेजी गई है। स्वीकृति मिलने के बाद पुलों का निर्माण किया जाएगा। सीपू गांव प्राकृतिक सुंदरता के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। गांव के समीप महादेव मंदिर में एक पत्थर पर भगवान शिव के पदचिह्न विद्यमान हैं। इसके अलावा महादेव गुफा, मिलती बाई ताल, पार्वती ताल, छू मापांग ताल और आंचरी ताल जैसे आकर्षक स्थल भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर सकते हैं। सड़क सुविधा मिलने से आदि कैलास, ओम पर्वत और पंचाचूली ग्लेशियर क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों के लिए भी इस क्षेत्र तक पहुंचना आसान होगा। ग्रामीणों का मानना है कि सड़क पहुंचने से सीपू की पहचान देश-दुनिया में बढ़ेगी. होम स्टे, स्थानीय उत्पादों और पर्यटन गतिविधियों के माध्यम से युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। सीमांत गांवों में सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार पलायन रोकने और सीमांत क्षेत्रों में आबादी को बनाए रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा। आजादी के 79 साल बाद सीपू तक वाहन पहुंचना केवल सड़क सुविधा का मिलना नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्र के विकास और ग्रामीणों की वर्षों पुरानी उम्मीदों को नई उड़ान मिलने जैसा है।

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