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  • Written By: Admin
  • Published: October 02, 2026 05:05 PM IST
राज्य

गैरसैंण में रामपुर तिराहा गोलीकांड के शहीदों की याद में काला दिवस

गैरसैंण। शुक्रवार को  रामपुर तिराहा गोलीकांड की बरसी पर गैरसैंण में शहीदों की याद में  काला दिवस मनाया गया। इस दौरान रामपुर तिराहा गोली कांड के शहीदों को दो मिनट का मौन रखकर स्थाई राजधानी गैरसैंण संघर्ष समिति के तत्वावधान में विभिन्न राजनेतिक संगठनों ने श्रद्धांजलि दी। साथ ही गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाये जाने की मांग की।
गैरसैंण के रामलीला मैदान मे आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस,यूकेडी,स्थायी राजधानी संघर्ष समिति गैरसैंण व राजधानी गैरसैंण समिति ने रामपुर तिराहा गोलीकांड को लेकर आज काला दिवस मनाया। इस दौरान रामलीला मैदान में एकत्रित होकर सभी ने वीरचंद्र सिंह गढ़वाली की मूर्ति पर माल्यार्पण कर रामपुर तिराहा गोलीकांड के शहीदों को याद करते हुए दो मिनट का मौन रखा। इस दौरान गांधी जयंती के अवसर पर रघुपति राघव राजा रामष् गीत गाकर प्रदर्शनकारियों ने स्थाई राजधानी गैरसैंण बनाये जाने की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शन कारियों ने गैरसैंण को शीघ्र स्थाई राजधानी घोषित करने की मांग की। साथ ही प्रदर्शनकारियों ने गैरसैंण रामलीला मैदान से नगर पंचायत कार्यालय होते हुए मुख्य चौराहे तक रैली निकालकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी व प्रदर्शन किया। इस दौरान स्थाई राजधानी संघर्ष समिति गैरसैंण के अध्यक्ष नारायण सिंह बिष्ट ने कहा कि,आज गैरसैंण में हो रहे प्रदर्शन की आवाज देहरादून तक जाएगी। उन्होंने कहा कि आज हम यहां से सरकार को चेताना चाहते हैं कि सरकार तुरंत राजधानी पर फैंसला लें, अन्यथा इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा। राजधानी गैरसैंण समिति के संयोजक पूर्व सचिव (आईएएस) उत्तराखंड विनोद प्रसाद रतूड़ी ने कहा कि, आज गैरसैंण में स्थाई राजधानी की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन व धरना दिया गया। उन्होंने बताया 18 अक्टूबर से हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में क्रमिक अनशन शुरू होने जा रहा है। जिसमे 31 अक्टूबर तक की रणनीति तैयार कर ली गई है। यूकेडी युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशुतोष नेगी ने कहा कि 2 अक्टूबर के दिन उत्तराखंड के लिए शोक का दिवस है। रामपुर तिराहे में हमारे राज्य आंदोलनकारी शांति पूर्वक चल रहे थे लेकिन उन पर मुलायम सिंह सरकार ने बर्बरता पूर्वक गोली चलाई। जिसमें हमारे 7 लोग शहीद हो गए। जिसे आज हर उत्तराखंडी काला दिवस के रूप में मना रहा है।

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